प्रार्थना

हे निर्गुण, हे सर्वगुणाश्रय,

हे निरुपम, हे उपमामय!

हे अरूप, हे सर्वरूपमय,

हे शाश्वत, हे शान्तिनिलय!!

हे अज, आदि, अनादि, अनामय,

हे अनन्त, हे अविनाशी!

हे सच्चित-आनन्द, ज्ञानघन,

द्वैतहीन, घट-घट-वासी!!

हे शिव, साक्षी, शुद्ध, सनातन,

सर्वरहित, हे सर्वाधार!

हे शुभमन्दिर, सुन्दर, हे शुचि,

सौम्य, साम्यमति, रहितविकार!!

हे अन्तर्यामी, अन्तरतम,

अमल, अचल, हे अकल, अपार!

हे निरीह, हे नर-नारायण,

नित्य-निरंजन, नव, सुकुमार!!

हे नव नीरद-नील, नराकृति,

निराकार, हे नीराकार!

हे समदर्शी, संत-सुखाकर,

हे लीलामय प्रभु साकार!!

हे भूमा, हे विभु, त्रिभुवनपति,

सुरपति, मायापति, भगवान्!

हे अनाथपति, पतित-उधारन,

जन-तारन, हे दयानिधान!!

हे दुर्बलकी शक्ति, निराश्रय-

के आश्रय, हे दीनदयाल!

हे दानी, हे प्रणतपाल,

हे शरणागतवत्सल, जनपाल!!

हे केशव, हे करुणासागर,

हे कोमल, अति सुहृद् महान्!

करुणाकर अब उभय-अभय

चरणोंमें हमें दीजिये स्थान!!

सुर-मुनि-वन्दित कमलानन्दित,

चरण-धूलि तव मस्तक धार!

परम सुखी हम हो जायेंगे,

होंगे सहज भवार्णव पार!!